सेल क्या है?

सेल बैटरी का एक यूनिट है. जो केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलता है.जिसे हम सेल कहते है.

बैटरी क्या है?बैटरी की परिभाषा क्या है?

cell के समूह को बैटरी कहते है.जो इलेक्ट्रिकल एनर्जी को केमिकल एनर्जी में बदलता है.जिसे हम बैटरी कि परिभाषा भी बोल सकते है.

बैटरी किसे कहते है

सेल के फंक्शन. cell function definition

सेल के फंक्शन दो तरह के होते है.

  • इलेक्ट्रिकल एनर्जी को केमिकल एनर्जी में बदलता है.
  • केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलता है.

बैटरी के सिंबल(symbol):  batter symbol

battery symbol

 

सेल के symbol. cell symbol electrical     

cell ka symbol

इलेक्ट्रोलाइट क्या है. electrolyte kya hai hindi mein.

इलेक्ट्रोलाइट एक कंडक्टिंग लिक्विड (conducting liquid) कि तरह करंट को पास करता है.लेकिन जब भी करंट इससे ज्यदा गुजरता है. तो इलेक्ट्रोलाइट आयन (ions) में टूट जाते है. जैसे  H₂SO₄→2 H+ + SO4– –

केमिकल इफेक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक करंट

chemical effect of electric current in hindi

जब भी कोई करंट किसी पदार्थ (electrolyte) से गुजरता है. तो इलेक्ट्रोलाइट आयन (ions)में टूट जाते है.इलेक्ट्रोलाइट के इसी परिवर्तन को ही केमिकल इफ़ेक्ट ऑफ़ इलेक्ट्रिक करंट कहते है.

इलेक्ट्रोड्स वह प्लेट जिसके द्वारा करंट को इलेक्ट्रोलाइट तक पहुंचाते है. उसे इलेक्ट्रोड कहते है.

एनोड वह प्लेट जो बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से जुड़ा होता है. या जिसमे पॉजिटिव चार्ज विकसित होता है. उसे एनोड कहते है.

कैथोड वह प्लेट जो बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से जुड़ा होता है. या जिसमे नेगेटिव चार्ज विकसित होता है.उसे कैथोड कहते है.

वोल्टमीटर बैटरी का बाहरी कन्टेनर जिसमे इलेक्ट्रोलाइट और इलेक्ट्रोड्स रहते है.वोल्टमीटर कहते है.

सेल कितने प्रकार के होते हैं?.

cell ke prakar in hindi.

सेल दो प्रकर के होते है.

  • प्राइमरी सेल (primary cell)
  • सेकंड्री सेल (secondry cell)

प्राइमरी सेल क्या है ?

primary cell kya hai.

इस तरह कि सेल को  हम एक ही बार इस्तेमाल कर सकते है.जो डिस्चार्ज होने पर दोबारा रिचार्ज नही कर सकते है. वैसे सेल को प्राइमरी सेल कहते है.वैसे प्राइमरी सेल का उपयोग कम करंट लेने के लिए करते है. और इसका कार्यकाल भी कम होता है.

जैसे  – danial cell, leclanche cell, bunsen cell, आदि

 

प्राइमरी बैटरी

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ट्रांसफार्मर क्या है? ट्रांसफार्मर किसे कहते हैं

सेकेंडरी सेल क्या है.

secondry cell keya hai. 

सेकंड्री सेल वह सेल है, जिसका उपयोग हम बार-बार कर सकते है. जो डिस्चार्ज होने पर दोबारा रिचार्ज भी कर सकते है. इसको हम लगातार कामो में इस्तेमाल  कर सकते है. और इसका कार्यकाल  लम्बा तथा बैटरी भारी होता है.

जैसे  – lead acid cell, nickel iron cell आदि

एक अच्छे सेल कि क्या क्या विशेषता होनी चाहिए

  • e.m.f अधिक एवं constent होना चाहिए
  • इंटरनल रेजिसटेंस कम होना चाहिए
  • लोकल एक्शन तथा polarazation नही होना चाहिए
  • जब सेल working condition में हो तो कोई भी external केमिकल एक्शन आनावयस्क रूप से नहीं होना चाहिए
  • working condition में सेल से जहरीली गैस एवं बदबू नही आनी चाहिए
  • सेल सस्ता तथा durable होना चाहिए
बैटरी चार्जिंग मेथड
battery charging methods in hindi.

सेल या बैटरी को चार्ज करने के लिए source का पॉजिटिव टर्मिनल को बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से जोड़ते है. और नेगेटिव टर्मिनल को बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से जोड़ते है.

D.c Source से बैटरी को चार्ज करने के लिए बैटरी चार्जिंग मेथड दो प्रकार होते है.

  1.  constant current method
  2.  constant voltagemethod

कांस्टेंट करंट मेथड

constant current method of battery charging

कांस्टेंट करंट बैटरी चार्जिंग मेथड का उपयोग नयी बैटरी को पहली बार चार्ज करने के लिए किया जाता है. इस विधि में एक्सटर्नल (external ) रेजिस्टेंस को कण्ट्रोल करके चार्जिंग के दोरान दी जाने वाली करंट को constant रखते है. क्योंकि नयी बैटरी को शुरु में चार्ज करने के लिए अधिक समय तक करंट कि जरुरी पड़ता है.

कांस्टेंट वोल्टेज मेथड से चार्जिंग

constant voltage method of charging

कांस्टेंट वोल्टेज मेथड में चार्जिंग के समय वोल्टेज को एक जैसा रखना पड़ता है. जो कि शुरु में करंट अधिक रहती है,लेकिन जैसे -जैसे बैटरी चार्ज होती जाती है,उसमे काउंटर e.m.f पैदा हो जाता है. और ये दिए गए वोल्टेज को कम करके करंट को भी कम करता है. जिसे हम कांस्टेंट वोल्टेज चार्जिंग मेथड कहते है. यह विधि बहुत अधिक प्रयोग होती है.

हाई रेट डिस्चार्ज सेल टेस्टर

यह एक ऐसा सेल टेस्टर है. जो किसी बैटरी पर अच्छी प्रकार लोड डालकर टर्मिनल वोल्टेज बताता है. बैटरी पर लोड डालने के लिए इसमें रेजिसटेंस लगी रहती है. टर्मिनल वोल्टेज बताने के लिए वोल्टमीटर तथा एक लैंप लगी रहती है. इस टेस्टर को चोडाई इतनी होती है. कि एक सेल कि दोनों टर्मिनल पर फिट बैठ सकता है.

सावधानी – टेस्टर को सेल पर अधिक देर तक नहीं लगाना चाहिए .

टेस्टर को सेल पर लगाने से पहले टर्मिनल को अच्छे से साफ करना चाहिए .

वोल्टमीटर कि रीडिंग जरुर लेनी चाहिए जिसमे फूल , हाफ, dead लिखा हुआ रहता है.

फुल का मतलब बैटरी पूरा चार्ज है .

हाफ का मतलब बैटरी आधा चार्ज है .

dead का मतलब बैटरी पूरा डिस्चार्ज है .

ट्रिकल चार्जिंग? trickle charging in hindi

ट्रिकल चार्जिंग विधि में कम करंट पर बैटरी को अधिक देर तक चार्ज करने कि प्रक्रिया को ट्रिकल चार्जिंग कहते है.जैसे : – इमरजेंसी लाइट ,

सोलर सेल (cell)क्या है?

वह इलेक्ट्रिकल डिवाइस जो सौर उर्जा  को इलेक्ट्रिकल उर्जा  में photo voltaic इफ़ेक्ट के द्वारा परिवर्तित करता है.जिसे हम सोलर सेल कहते है. सोलर  सेल को photo voltaic सेल भी कहते है. क्योंकि photo  का मतलब लाइट होता है,और voltaic का मतलब इलेक्ट्रिसिटी होता है.

सोलर सेल क्या है

सोलर सेल का सिद्धांत

सोलर सेल तीन स्टेप में कार्य करता है.

स्टेप 1

सोलर एनर्जी को absorve करने के लिए सोलर पेनल लगाये जाते है.जो सोलर पेनल सौर उर्जा को एकत्रित करता है.और अपने निचे लगे कनवर्टर को दे देता है.

स्टेप 2

कनवर्टर में सेमी कंडक्टर मटेरियल होता है. जिसे सिलिकॉन कहते है. सिलिकॉन में टोटल 14 इलेक्ट्रान होते है. और इसका इलेक्ट्रान configuration 2, 4, 8 होते है.

सिलिकॉन मटेरियल को दो भागो में विभाजित करके उसे अलग – अलग मटेरियल के साथ dope करते है. dope का मतलब किसी मटेरियल में imperities को मिलाना होता है. जिससे उस मटेरियल का एनर्जी लेवल हाई हो सके. जैसा कि हम जानते है. सेमी कंडक्टर मूल रूप से इंसुलेटर कि तरह कार्य करता है. और Dope कराने पर कंडक्टर कि तरह कार्य करता है.

यहाँ सेमी कंडक्टर के रूप में सिलिकॉन मटेरियल का उपयोग करते है. जिसमे टोटल 14 इलेक्ट्रान होते है. और 4 बैलेंस इलेक्ट्रान होते है. इस सिलिकॉन को dope करने से पहले दो भागो में विभाजित कर देते है. पहले वाले हिस्से को फास्फोरस मटेरियल के साथ dope कर देते है. क्योंकि फास्फोरस में 5 बैलेंस इलेक्ट्रान होते है. इसलिए dope करने के बाद इस हिस्से में कुल 9 इलेक्ट्रान हो जाते है. यह एक extra इलेक्ट्रान फ्री इलेक्ट्रान कहलाता है. क्योंकि इस हिस्से में इलेक्ट्रान कि संख्या 1 जादा है. इसलिए यह नेगेटिव बन जाता है. जिसे N – Type कहते है.

स्टेप 3

N-टाइप और P – टाइप इलेक्ट्रान

सोलर सेल का सिद्धांत  –  N – टाइप में एक एक्स्ट्रा इलेक्ट्रान होता है. और P- टाइप में एक होल है.जो दोनों अपोजिट चार्ज होने कि वजह से एक दुसरे को अकर्सित करते है.परन्तु एनर्जी गेप कि वजह से फ्री इलेक्ट्रान जम्प (JUMP)नही कर पता  है.इस तरह सोलर एनर्जी के उपयोग से एनर्जी गेप को ब्रेकअप करते है.तब फ्री इलेक्ट्रान N -टाइप से P – टाइप में जम्प कर जाता है. जिसके बिपरीत इलेक्ट्रिसिटी उत्पन होती है.इस इलेक्ट्रिसिटी को स्टोर करके डायरेक्ट उपयोग किया जा सकता है.

सोलर सेल का उपयोग – calculator, toise, mobile phones, setelites, और intigrated circuit में करते है.

सेल की कैपेसिटी

बैटरी कि कैपेसिटी दो प्रकार से निकलते है.

फुल कैपेसिटी – किसी फुल चार्ज सेल को पूरा डिस्चार्ज करने तक के समय को आउटपुट करंट से गुणा करते है. इस प्रकार से निकाली गई कैपेसिटी फुल कैपेसिटी कहलाती है. लेकिन ऐसा करना practically उचित नही है. क्योंकि complete डिस्चार्ज बैटरी को फिर से रिचार्ज करना कठिन हो जाता है. इसलिए यह तरीका सही नही है.

नार्मल कैपेसिटी – इस मेथड में फुल चार्ज सेल को 1.8V तक डिस्चार्ज करने के समय को आउटपुट करंट से गुणा करते है इस प्रकार से निकाली गयी कैपेसिटी नार्मल कैपेसिटी कहलाती है.

 

 

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