जमशेदपुर स्टील प्लांट

पूर्वी सिंगभूम

झारखण्ड का एक ऐसा जिला जो आज जमशेदपुर इस्पात नगरी या टाटा नगर के नाम से जाना जाता है. ये जिला आज भारत के शीर्ष स्थानों में अपना जगह बना चुका है. पूर्वी सिंगभूम यानि जमशेदपुर को प्राकृतिक ने हरियाली और खनिज संपदाओ से भी भरा है. पूर्वी सिंगभूम, जमशेदपुर में भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टील प्लांट है. जिसका देश और दुनिया भर में इसका एक अलग पहचान बना हुआ है. आगे हम विस्तार से चर्चा करेंगे, पूर्वी सिंगभूम जिला के बारे में|

ये भी पढ़े  खूंटी जिला कब बना है

एक नजर जिला के बारे में

जिला – पूर्वी सिंगभूम(जमशेदपुर)

जनसँख्या – 2293919

क्षेत्रफल – 3533 वर्ग किलोमीटर

भाषा – हिंदी

गाँव – 1785

पिन कोड – 831001

R.T.O  CODE – JH05

official websitejamsedpur.nic.in

पूर्वी सिंगभूम जिला

झारखण्ड का 24वा जिला में से एक पूर्वी सिंगभूम जिला जो 16 जनवरी 1990 को पुराने सिंगभूम से 9 प्रखंड को अलग करके गठित किया गया है| जिसका मुख्यालय जमशेदपुर को बनाया गया है| जो आज जमशेदपुर जिला के नाम से भी जाना जाता है. इस जिले के पूर्व में झारग्राम जिला, पश्चिम में सरायकेला जिला, उतर में पुरुलिया जिला, और दक्षिण में ओडिशा के मयुरभंज जिला से घिरा हुआ है. पूर्वी सिंगभूम जिला 50% घने जंगलो और पहाड़ो से ढाका हुआ है. इस जिला में कभी वन्य जीव यानि जंगली जानवर खुले आम घूमते थे. लेकिन आज ये एक प्रसिद शहरो में से एक है. और झारखण्ड के सबसे अधिक जनसँख्या वाला जिला पूर्वी सिंगभूम(जमशेदपुर) है.

पूर्वी सिंगभूम जिला मानभूम जिला और धनभुम जिला का हिस्सा था. जो आजादी के बाद इसे सिंगभूम में मिला दिया गया|

टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) के स्थापना से इस जिले को एक नयी पहचान मिली| इसके पहले यह एक साकची नामक आदिवासी गाँव हुआ करता था| यहाँ कि मिटटी काली होने के चलते यहाँ के रेलवे स्टेशन का नाम को भी कालीमट्टी रखा गया था| जो बाद में इसे टाटा नगर रेलवे स्टेशन में बदला गया| यहाँ खनिज का प्रचुर भंडार होने के चलते एवं आसानी से खड़कई नदी और स्वर्ण रेखा नदी से पानी मिलने के करण यहाँ टाटा स्टील प्लांट कि स्थापना हो सकी|

पूर्वी सिंघभूम जिले मे कितने प्रखंड है

जिला को दो सब – डिवीज़न में बांटा गया है. “धालभूम और घाटशिला” इस जिला में कुल 11 प्रखंड है. जो इस प्रकार है.

घाटशिला

बोरम

पतमादा

पोटका

गोलमुरी सह जुगसलाई

मुसाबनी

डुमरिया

गुरबंद

धालभूमगढ़

बहरागोड़ा

चाकुलिया

पूर्वी सिंगभूम( जमशेदपुर ) में कितना विधानसभा है.

जिला में 6 विधानसभा है. जो इस प्रकार है.

बहरागोडा

घाटशिला

पोटका

जुगसलाई

पूर्वी  जमशेदपुर

पश्चिमी  जमशेदपुर

जिला  की  जलवायु

जिले की जलवायु समशीतोषण प्रकार की है. जो गर्मी के मौसम में 40 से 45 डिग्री सेंटीग्रेड तक पारा पहुँच सकता है. और ठण्ड के मौसम तापमान 7 से 8 डिग्री तक हो सकता है. इस जिला में दक्षिण – पश्चिम मानसून का प्रभाव रहता है. जो जुलाई से सितम्बर के बीच भारी वर्षा होता है.

कृषि और सिंचाई परियोजना 

जिला में कृषि का भी बहुत बड़ा योगदान है. यहाँ धन, सरसों, ज्वार, बाजरा, मक्का, सुरगुजा, कोदो, आदि का फसल भरपूर मात्रा में उगाया जाता है. इसके अलावा मौसमी सब्जी का भी उत्पादन किया जाता है. जिला की मिटटी, मुख्यता लाल मिटटी है. जो मक्का, बाजरा, ज्वार जैसे फसलो का उत्पादन करने के लिए सबसे उपयुक्त मना जाता है.

सिंचाई परियोजना  – जिला में खेती के लिए सिंचाई परियोजना का निर्माण किया गया है. जो हर मौसम में जरुरत के हिसाब से पानी उपलब्ध हो सके| ताकि कृषि को और बेहतर किया जा सके|

परियोजना का नाम               स्थापना वर्ष

स्वर्ण रेखा प्रोजेक्ट                पांचवी पांचवर्षीय योजना

नकटी जलाशय                   1983

सुरंगी जलाशय                    1987

सतपोटका जलाशय             1982

झरझरा जलाशय                   —-

सोनुआ जलाशय                 1982

सुरु जलाशय                      —-

अर्थव्यवस्था

पूर्वी सिंगभूम जिला खनिज और औधोगिक क्षेत्र में उच्च स्थान प्राप्त है. जमशेदपुर भारत का एक औधोगिक शहर है. घाटशिला में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का कारखाना है. जो भारत का सबसे बड़ा तांबा गलाने वाला कारखान है. जमशेदपुर में टाटा स्टील लिमिटेड कंपनी है. इसके अलावा जिले के दक्षिण भाग में चाकुलिया शहर है. जहाँ चावल की मिल, तेल की मिल, साबुन के कारखाने है. जिसके चलते जमशेदपुर कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह औधोगिक क्षेत्र पर निर्भर है.

खनिज

जमशेदपुर खनिज के मामले में भी धनी है. यहाँ अनेक तरह के खनिज पाये जाते है. जिसमे मैंगनीज, सोना, वेनेडियम, युरेनियम, थोरियम, लोह अयस्क, तांबा, सोपस्टोन, कायोनाईट, आदि का प्रचुर भंडार है. जिससे यहाँ के अर्थव्यवस्था को एक गति मिलता है.

नोट – जादूगोड़ा में यूरेनियम का बहुत बड़ा खन है.

वनस्पति और वन्य जीव

यहाँ के जंगल पर्णपाती प्रकार के है. “यानि वैसे पेड़ पौधे जो हर साल कोई भी मौसम में अपने पते को गिराते” हो. इस जिला में महुआ, पलाश, बांस, साल, गामर, लम्बी घास खजूर की पेड़ो की  संख्या अधिक है. लेकिन फैक्ट्री और खनन के चलते बहुत सारे पेड़ो की कटाई हुई है. जिले में कुल 33% जंगली भाग है. यहाँ के जंगल में विभिन्न प्रकार के पौधे और औषधीय पौधे पाए जाते है.

इस जिले में जंगली जानवर का भी निवास स्थान है. घने जंगल होने के करण यहाँ  हाथी अक्सर मिलते रहते है. इसलिए यहाँ एक दलमा जंगली पशु अभ्यारण्य भी है. जो हाथी जैसे जंगली जानवर को संरक्षित करने लिए बनाया गया है. यहाँ खुले में जंगली सांड को भी घूमते देखा जा सकता है.

यहाँ के जंगल में बाघ और तेंदुवा भी है. जो नहीं के बराबर दिखाई देते है. बहुत संयोग में ही भटकने की अवस्था में ही इंसानों पर हमला करते है.

भालू भी इस इस जगह में अधिक संख्या में पाए जाते है. जो कभी कभी ये इंसानों पर भी हमला कर देते है. और फसल आदि को भी नुकसान पहुंचाते है.

जंगली सूअर की भी संख्या अधिक है. और ये खेती को नुकसान पहुंचाते रहते है. जिला में जंगली कुता को अक्सर देखा जाता है. जो कभी कभी पालतू जानवर पर भी हमला कर देते है. इसके अलावा सांभर और हिरण को भी देखा जा सकता है. लेकिन वर्तमान में इसकी संख्या घाट चुकी है.

नदियाँ एवं पठार

जमशेदपुर जिला में स्वर्ण रेखा नदी है. जो रांची के पिस्का नागडी रानी चूंबा से निकलता है. और ये नदी पश्चिम से दक्षिण पूर्व की दिशा में बहती है. इस क्षेत्र के जितने भी उपनगर है. वे सभी स्वर्ण रेखा नदी को छूती है. इस नदी में सोना मिलता है.

जिला का 53% क्षेत्र पहाडियों से ढाका हुआ है. जिसमे ग्रेनाईट, गनीस, स्किस्ट और बेसाल्ट जैसा चट्टान शामिल है. जो छोटानागपुर पठार का हिस्सा है. वैसे छोटानागपुर पठार झारखण्ड का खजाना है. जिसमे खनिज पदार्थ का विशाल भंडार है. जो औधोगिक जगत के लिए रामबाण की तरह कार्य करता है.

जमशेदपुर के पर्यटक स्थल

शहर में बहुत से ऐसे पर्यटक स्थल है. जो सेलानियो के लिए आकर्षक केंद्र बना हुआ है. जो दूर दराज इलाको से यहाँ देखने के लिए आते है. जमशेदपुर के पर्यटक स्थल कुछ इस तरह से है.

जुबली पार्क

झारखण्ड के खुबसूरत पार्क में से एक जुबली पार्क है. जो जमशेदपुर में स्थित है. ये पार्क लगभग 500 एकड़ में फैला है. इस पार्क का निर्माण टाटा स्टील द्वारा 1955 में किया गया है. इस पार्क को बनाने में 2 साल का समय लगा था.

इस पार्क में जमशेद जी टाटा की मूर्ति है. और उसके अगल बगल में रोज गार्डन, मुग़ल गार्डन, मुख्य झील, मनोरंजन पार्क, टाटा स्टील वन्य जीव उधान और झील के बिच में कृत्रिम टापू है. झील में नौका बिहार की भी सुविधा है.

मुग़ल गार्डन में फव्वारों का भी आनंद लिया जा सकता है. जुबली पार्क के उतर में दलमा अभयारण्य है. और दक्षिण में टाटा स्टील के नजारा देखने को मिलता है.

दलमा अभयारण्य

ये अभयारण्य हाथी के संरक्षण के लिए 1975 में बनया गया है. जो झारखण्ड के जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के बीच बसा एक वन्य जीव अभयारण्य है. इस जगह में जानवरों को पानी पीने के लिए एक तालाब का भी निर्माण किया गया है. यहाँ जंगली हाथी, हिरण, बाघ जैसे जानवर पाए जाते है.

डिमना लेक या झील

ये जगह जमशेदपुर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर है. जो दलमा पहाड़ी के पास बना एक कृत्रिम झील है. जो पर्यटक सालो भर यहाँ आते रहते है. जनवरी महीने में यहाँ पिकनिक मनाने के लिए पर्यटक आते है. इस कृत्रिम झील का निर्माण टाटा स्टील द्वारा  बोडम प्रखंड में किया है. जिसमे नौका बिहार का भी सुविधा है. इस झील को बनाने का मुख्य उदेश्य जल संरक्षण, एवं शहर के लोगो को जल संकट से मुक्ति दिलाना. जो यहाँ के लोगो के लिए बनाया गया है.

धरगिरी जलप्रपात

ये जलप्रपात बहुत ही लोकप्रिय जलप्रपात है. जो पर्यटकों के लिए एक आकर्षक केंद्र है. इस जलप्रपात की ऊंचाई लगभग 20 फिट है. इसके चारो तरफ की हरियाली, जो एक बहुत ही खुबसूरत दृश्य को बनाता है.

जयंती सरोवर/ जुबली लेक 

सबसे पहले इस जगह को जुबली लेक के नाम से जाना जाता था. बाद में इसे जयंती सरोवर का नाम दिया गया. इस झील को खास, बोटिंग के लिए बनाया गया है. जिसमे नौका विहार का अन्नंद लिया जा सकता है. यह पर्यटकों के लिए खासा लुभावना जगह है. इस झील में एक आईलैंड भी बनाया गया है. ये झील लगभग 40 एकड़ जगह में फैली है.

दुमुहानी

ये भी एक देखने योग्य पर्यटक स्थल है. यह जगह मैरिन ड्राइव में स्थित है. और ये स्वर्ण रेखा और खरकई नदियों का संगम स्थल है.

हुडको झील 

यह एक कृत्रिम झील है. जो छोटा गोविन्दपुर और टेल्को कालोनी के बीच टाटा मोटर्स द्वारा बनाया गया है. इस जगह को खास पिकनिक स्पॉट के लिए जाना जाता है.

कीनन स्टेडियम

झारखण्ड का अंतरराष्ट्रीय  स्तर का स्टेडियम है. जो क्रिकेट ग्राउंड के नाम से भी जाना जाता है. इस स्टेडियम में बहुत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलो का आयोजन हो चुका है. इस स्टेडियम को सबसे सुंदर क्रिकेट स्टेडियम मना जाता है|

जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

यह जेआरडी टाटा कॉम्प्लेक्स जमशेदपर के नॉर्थन टाउन मे स्थित है. इस कॉम्प्लेक्स मे लगभग 23000-24000 दर्शकों की क्षमता वाला शहर का सबसे बड़ा खेल परिसर है. इन दिनों इस कॉम्प्लेक्स का उपयोग फुटबॉल और एथलेटिक्स के लिए किया जाता है. इसमें जेआरडी टाटा कॉम्प्लेक्स मे तिरंदाजी, हैंडबॉल, मुक्केबाजी, मार्शल  आर्ट, निशानेबाजी, शातरंज आदि तरह के खेल की सुविधाएं उपलब्ध है!

इसके अलावा यहाँ भुनेश्वर मंदिर, भाटिया पार्क, गोल पहाड़ी मंदिर, टाटा काम्प्लेक्स जैसा जगह है. जो देखने योग्य है. और पर्यटक आसानी से इस जगह में घूम सकते है.

जमशेदपुर में समाचार पात्र का प्रकाशन

जिला में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के अख़बार प्रकाशित किये जाते है. जिसमे अमृतबाज़ार पत्रिका, उदित वाणी, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, दैनिक हिंदुस्तान आदि अख़बार शामिल है. इसके अलावा लोकल टीवी चैनल ई. टीवी बिहार झारखण्ड, सहारा समय का ऑफिस भी जमशेदपुर में है. जो झारखण्ड को लाइव टेलीकास्ट, इसी जगह से किया जाता है.

भाषा, संस्कृति एवं रीति रिवाज

जिला में विभिन्न जाति एवं धर्मो के लोग निवास करते है. जिसमे हिन्दू, मुस्लिम, ईसाईं, सरना धर्म जैसे जाति शामिल है. इसलिए यहाँ की संस्कृतक एवं रीति रिवाज अलग अलग है.

हिन्दू धर्म – यहाँ हिन्दू की संख्या अधिक है. इसलिए जिला में दुर्गा पूजा, मकर सक्रांति, काली पूजा, होली, दीपावली, छट, रामनवमी, रथ आदि त्यौहार को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.

मुस्लिम – यहाँ मुस्लिम धर्म के लोग भी निवास करते है. इसलिए यहाँ ईद, बकरीद, मुहरम जैसे त्यौहार भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है.

ईसाई – जिला में ईसाई धर्म को मानने वाले लोग भी है. जिसका प्रमुख त्यौहार क्रिसमस है. इस धर्म के लोग भी इस त्यौहार को बड़े ही धूम धाम से मानाते है.

सरना धर्म – ये आदिवासियों का धर्म है. और इस धर्म के लोग जिला के हर गाँव और शहरो में देखने को मिलेंगे| सरना धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार सोहराई, सरहुल, कर्मा पूजा है. जो हर साल आदिवासी इस त्यौहार को बड़ी धूम धाम से मानाते है.

इसके अलावा यहाँ टुसू, जैसे त्यौहार को भी मनाया जाता है.

भाषा – जमशेदपुर शहर में अनेक प्रकार के भाषा बोली जाती है. जिसमे संथाली, उड़िया, बंगाली. कुद्माली, हो, और हिंदी भाषा शामिल है.

पूर्वी सिंहभूम जिला कॉलेज और विश्वविद्यालय

एम.जी.एम मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल

करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर

जमशेदपुर को – आपरेटिव कॉलेज

वर्कर कॉलेज जमशेदपुर

 women कॉलेज जमशेदपुर

दि ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर women

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज जमशेदपुर

नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी जमशेदपुर

श्रीनाथ कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन जमशेदपुर

LBS मेमोरियल कॉलेज जमशेदपुर

नोट – जितने भी कॉलेज इस लिस्ट में है. वे सभी कोल्हान यूनिवर्सिटी के द्वारा मान्यता प्राप्त है. इसके अलावा और भी कॉलेज है. जो इस लिस्ट में शामिल नही है.

जमशेदपुर के स्कूल

केरला पब्लिक स्कूल

डी.बी.एम.एस कदमा हाई स्कूल

डी.ए.वी पब्लिक स्कूल बिस्टूपुर

दिल्ली पब्लिक स्कूल जमशेदपुर

सेंट मैरी हाई स्कूल

हिल टॉप स्कूल टेल्को

टेक्नीकल कॉलेज जमशेदपुर

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी NIT जमशेदपुर

रणविजय सिंग कॉलेज ऑफ़ इजीनयारिंग एंड टेक्नोलॉजी

जीनियस इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी

राष्ट्रीय टेक्निकल इंस्टिट्यूट

गवर्मेंट  पॉलिटेक्निक आदित्यपुर

मेरीलैंड इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट

अवध कॉलेज ऑफ़ अर्कीटेक्चर जमशेदपुर

BA कॉलेज ऑफ़ इंजीयरिंग जमशेदपुर

गवर्मेंट women पॉलिटेक्निक कॉलेज जमशेदपुर

RVS कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी

रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी जमशेदपुर

अलका वीर पॉलिटेक्निक जमशेदपुर

जमशेदपुर रिसर्च सेंटर

राष्ट्रिय धातु अनुसंधान केंद्र जमशेदपुर

स्वस्थ सेवा

जमशेदपुर शहर में बेहतर स्वस्थ के लिए हॉस्पिटल है. जो शहर के लोगो को बेहतर स्वस्थ सुविधा उपलब्ध कराती है. जिसमे टाटा का भी हॉस्पिटल शामिल है.

एम.जी.एम मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल

कांतिलाल हॉस्पिटल

टाटा मैन हॉस्पिटल

परिवहन सुविधा

जमशेदपुर शहर सड़क और रेल मार्ग के द्वारा पुरे देश से जुड़ा हुआ है. हावड़ा मुंबई रेलवे लाइन पर स्थित होने के करण टाटा नगर रेलवे स्टेशन बहुत व्यस्त रेलवे स्टेशन मना जाता है. राष्ट्रिय राजमार्ग 33 जमशेदपुर शहर से होकर गुजरती है. इसके अलावा शहर के उतर पूर्वी हिस्सा में सोनारी एयरपोर्ट है. जो वायुदूत कंपनी के सेवा से जुड़ा हुआ है. जमशेदपुर शहर की सड़क दुसरे शहर से बहुत अच्छा है. क्योंकि यहाँ के सड़क का रख रखाव टाटा परिवार द्वारा होता है.

हवाई जहाज – जिला में एयर डेकन द्वारा कोलकाता हवाई अड्डे के द्वारा जुड़ा हुआ है. यहाँ एक प्राइवेट कंपनी का हवाई जहाज सप्ताह में दो बार दिल्ली के लिए उडान भारती है. कोलकाता और रांची इसके नजदीकी एयरपोर्ट है.

रेल मार्ग – यहाँ टाटा नगर रेलवे स्टेशन है. जो भारत के कई लोकप्रिय शहरों के साथ जुड़ा हुआ है.

सड़क मार्ग – जिला का सड़क भारत के बड़े बड़े शहरों के साथ जुड़ा हुआ है. जिसमे राष्ट्रीय राजमार्ग 33 जमशेदपुर शहरों से होकर गुजरती है. इसलिए यहाँ दुसरे राज्यों से आने के लिए डायरेक्ट बस सेवा उपलब्ध है. जिसमे बिहार, कोलकाता, उड़ीसा आदि शामिल है. जिला में सिटी बस की भी सुविधा है. जिसमे सरकारी और प्राइवेट बस शामिल है.

जमशेदपुर के लोकप्रिय लोग

अंशुमन भगत लेखक, जमशेदपुर

आदर्श गौरव फिल्मी हीरो

इम्तियाज अली, निर्देशक

प्रत्युषा बनर्जी, भारतीय टेलीविज़न अभिनेत्री

प्रियंका चोपड़ा अभिनेत्री, जमशेदपुर में जन्म

इशिता दाता, अभिनेत्री जमशेदपुर में पली बड़ी है

तनुश्री दाता अभिनेत्री, जमशेदपुर में जन्म और पली बड़ी है.

संजीवन लाल, निर्देशक

आर. माधवन, तमिल स्टार जमशेदपुर में जन्मे है, और पाले बड़े है

श्वेता प्रसाद अभिनेत्री, जमशेदपुर में जन्मी और पली बड़ी है.

सिमोन सिंह, बॉलीवुड अभिनेत्री

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा जमशेदपुर से ताल्लुक रखते है.

जमशेदपुर के नगर निगम

जिला में कुल 4 नगर निगम है. जो प्रकार है.

जुसलाई नगर पालिका

मानगो अधिसूचित क्षेत्र समिति

जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति

चाकुलिया

टाटा स्टील

भारत के एक ऐसे इस्पात कंपनी जिसने जमशेदपुर शहर को एक नयी पहचान दिलाई है| जिसको आज टाटा स्टील लिमिटेड के नाम से जाना जाता है| टाटा स्टील की चमक आज देश और दुनिया देख रही है| जिसने अपने काबिलियत के दम पर बहुत बड़ा एम्पायर(empire) खड़ा किया है| टाटा स्टील कंपनी कई देशो में फैला हुआ है| जो आज एक दिग्गज कंपनी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायीं है| आगे हम और विस्तार से चर्चा करेंगे टाटा स्टील प्लांट के बारे में|

टाटा स्टील के बारे में

भारत के झारखण्ड राज्य के जमशेदपुर शहर में टाटा स्टील लिमिटेड कंपनी को स्थापित किया गया है| जो एक बहुउदेशीय स्टील बनाने वाली कंपनी है. टाटा स्टील प्लांट प्रदेश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है| जो सबसे अधिक स्टील का निर्माण इसी प्लांट में होता है. और ये टाटा समूह का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है| इस प्लांट के बनने से शहर के लोगो का रोजगार की समस्या भी दूर हुआ है. टाटा स्टील प्लांट 34 मिलियन टन वार्षिक क्षमता के साथ दुनिया के शीर्ष कंपनियों में से एक है| यह सेल के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टील प्लांट है| टाटा स्टील प्लांट के अलावा यहाँ और भी टाटा समूह की कंपनी काम करती है| जिसमे टाटा मोटर्स, टिनप्लेट, टिमकन, टियूब डिवीज़न, टिसकान आदि शामिल है.

टाटा स्टील प्लांट के उत्पाद

यह प्लांट निम्न प्रकार की स्टील बनती है.

बियरिंग

पाइप्स

प्रेसिजन टियूब

कार के सामान

लोकोमोटिव पार्ट्स

कृषि उपकरण

मशीनरी

टिनप्लेट

केबल और तार

सरिया

टाटा स्टील प्लांट का एरिया

यह स्टील प्लांट लगभग 823 एकड़ भूमि में फैला है| जिसमे 7 भाटिया शामिल है. टाटा स्टील प्लांट झारखण्ड के बोकारो स्टील प्लांट से छोटा है. कच्चे उत्पाद और एरिया के हिसाब से सेल से छोटा एवं भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टील प्लांट है|

टाटा स्टील प्लांट की स्थापना

यह स्टील प्लांट वर्ष 1907 में सर दोराबजी टाटा / जमशेदजी द्वारा स्थापित किया गया है| जो इसी के नाम पर जमशेदपुर शहर का नाम रखा गया है| और आज इसी नाम से पुरे भारत में अपनी पहचान बनायीं है.

टाटा स्टील प्लांट की हिस्ट्री

ये प्लांट को पहले टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) के नाम से जाना जाता था| जो 1911 में इसने पहला पिग आयरन का उत्पादन शुरू कर दिया था. जो 1912 के आते – आते इसने मुख्य रूप से स्टील का भी उत्पादन शुरू कर दिया था.

1920 में टिस्को ने बर्मा सेल के साथ टिनप्लेट का उत्पादन शुरू किया और बाद ये कंपनी भी टिस्को में शामिल हो गया| जिसका बाजार हिस्सेदारी 70% है.

टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ने ब्रिटिश शासन कल में भी प्लांट का संचालन किया| जो आजादी के बाद वर्ष 1951 में कंपनी का आधुनिकरण एवं विस्तार करने का काम शुरू हुआ था| जिसका मकसद वर्ष 1958 तक 2 मिलियन मैट्रिक टन वार्षिक उत्पादन क्षमता होना चाहिए था. जिसके चलते उस समय जमशेदपुर में 60,000 लोगो को रोजगार के साथ जोड़ा गया था| जिसमे सबसे अधिक स्थानीय लोग थे|

जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट के अलावा और भी छोटी बड़ी कंपनी के कारखाने है| जिसमे टेल्को, टायो, उषा मार्टिन, जेम्को टेल्कान, बी.ओ.सी, तार कंपनी, टी.आर.एफ, टिनप्लेट जैसे कंपनी शामिल है.

आधुनिक स्टील एंड पॉवर लिमिटेड, कोहिनूर स्टील एंड पॉवर लिमिटेड, जैसे कंपनी भी कार्यरत है|

नोट – टाटा स्टील प्लांट भारत का सबसे पुराना स्टील प्लांट है.

टाटा स्टील प्लांट का राष्ट्रीयकरण

कंपनी को केंद्र सरकार के अधीन लाने के लिए दो बार प्रयास हुआ था| लेकिन दोनों प्रयास असफल साबित हुआ|

पहला प्रयास वर्ष 1971 में इंदिरा गाँधी के शासन कल में हुआ था| जिसमे कंपनी का राष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया गया था| जो असफल रहा था.

दूसरा प्रयास वर्ष 1977 में जनता पार्टी के शासन में हुआ था| जिसमे टाटा स्टील प्लांट को राष्ट्रीयकरण करना चाहता था. उस समय इस्पात मंत्री जार्ज फर्नाडीस ने राष्ट्रीयकरण करने के लिए धमकी भी दी थी| लेकिन यूनियन ने इसका जमकर विरोध किया था. जिसमे दूसरी बार भी असफल साबित हुआ| वर्ष 1990 में कंपनी ने प्लांट का विस्तार करना शुरू कर दिया था| और इसके साथ ही इसने न्यूयार्क में अपने सहायक कंपनी टाटा इंक की स्थापना की|

टिस्को कंपनी ने 2005 में अपना नाम बदला और अब टाटा स्टील प्लांट के नाम से जाना जाता है|

लोकप्रियता

टाटा स्टील प्लांट का मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में है| और इसकी मार्केटिंग ऑफिस कोलकाता, पश्चिम बंगाल के टाटा सेंटर में कार्यरत है| टाटा स्टील भारत के अलावा थाईलैंड, यु.ए.इ, कनाडा, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, मलेशिया, जैसे 26 देशो में इसकी उपस्थिति है|

टाटा स्टील अपनी गुणवता इस्पात के चलते आज देश – दुनिया में अपने ग्राहक को सेवा प्रदान करता है|

कॉमपिटीटार(प्रतियोगी)

इस कंपनी के मुख्य कॉमपिटीटार(प्रतियोगी) आर्सेलर मिताल, जिंदल स्टील एंड पॉवर, एवं सेल शामिल है|

पुरुस्कार

टाटा स्टील को 5 बार प्रधानमंत्री पुरुस्कार से भी नवाजा गया है| और तीन बार गुणवता और अच्छा स्टील निर्माण के लिए भी वर्ल्ड स्टील डायनामिक द्वारा भी पुरुस्कार दिया गया है|

नोट – टाटा स्टील प्लांट में सुभाष चंद्र बॉस और अरविन्द केजरीवाल भी काम कर चुके है|

टाटा स्टील के शेयर होल्डिंग

कंपनी का मार्च 2018 तक टाटा समूह के पास स्टील में 31.64% शेयर थे|

निष्कर्ष

हमने इस लेख के माध्यम से पूर्वी सिंगभूम / जमशेदपुर जिला के बारे में बताने का प्रयास किया है. मै आशा करता हु कि आपलोग भली – भांति समझ गए होंगे. इस लेख में कहीं भी कोई शब्द छुट गया है. तो हमे कमेंट जरुर करे, अगर ये लेख जारा सा भी अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों एवं सोशल मीडिया में जादा से जादा शेयर करे, धन्यवाद्

 

 

 

 

 

Leave a Reply

%d bloggers like this: