गिरिडीह पारसनाथ पहाड़ 

गिरिडीह कहां है.?और गिरिडीह जिला क्यों प्रसिद्ध है. जिला कब बना

    गिरिडीह की जानकारी

  • भारत के झारखण्ड राज्य के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के पूर्वोतर  दिशा मे स्थित है.जो कि झारखण्ड राज्य का एक प्रशानिक जिला है.गिरिडीह जिला का मुख्यालय गिरिडीह मे है.इस गिरिडीह जिला का निर्माण सन 4 दिसंबर 1972 को हज़ारीबाग जिले के कुछ हिस्से को काटकर गिरिडीह जिला को बनाया गया था.राष्ट्रीय राजमार्ग 114 A गिरिडीह से ही होकर गुजरता है.यह गिरिडीह जिला 24 डिग्री 11 मिनट उत्तर अक्षांश मे है,और 86 डिग्री 18 मिनट पूर्वी देशांतर के बीच मे स्थित है.उत्तरी छोटानागपुर के माध्य मे स्थित यह जिला 4854 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र मे फैला हुआ है.यह गिरिडीह जिला प्रकृति कि गोद की सुंदरता मे स्थित है.जो आंगतुको  का एक दर्शनीय स्थल का भ्रमण करने का विकल्प को प्रदान करता है.जो इसके चारों ओर प्रकृतिक स्थलों से बिखरा हुआ है.इन स्थलों पर भक्ति स्थानों का भ्रमण केन्द्र भी है.जो कि साल भार तीर्थयात्री आगमन करने आते रहते है.क्योंकि पारसनाथ पहाड़ी मंदिर जिला मे ही है.जो कि झारखण्ड का सबसे ऊँची चोटी पारसनाथ पहाड़ ही है.जिसकी ऊँचाई समुन्द्र तल से लगभग 4413 फिट की ऊँचाई मे है.जिसके चलते गिरिडीह जिला  को एक धार्मिक स्थान का महत्वपूर्ण दर्जा मिला है.जिसके लिए जैन धर्म के लोग तीर्थयात्रा करने के लिए आते है.सन 1947 मे गिरिडीह जिला  भारत का एक मुख्य हिस्सा बन गया था.जब गिरिडीह जिला को  15 नवंबर 2000  को बिहार राज्य से अलग होकर झारखण्ड राज्य मे शामिल किया गया.जिससे गिरिडीह जिला को खनिज़  के क्षेत्र मे महत्व बहुत ज्यादा मिला.

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     गिरिडीह का अर्थ क्या है

  •  Giridih का अर्थ है “गिरी” का अर्थ “पहाड़,पर्वत”और “डीह” का अर्थ है “क्षेत्र या फिर भूमि होता है यानि की गिरिडीह शब्द का शाब्दिक अर्थ निकलता है “पहाड़ों वाला क्षेत्र”

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     इतिहास (History)

  •  ब्रिटिश सरकार के शासनकाल के दौरान छोटानागपुर एजेंसी का हिस्सा बन गया था.यह गिरिडीह जिला का पूरा क्षेत्र ब्रिटिश सरकार के आर्थिक रूप मे फायदेमंद मे ही था.जो मुगल साम्राज्य के रूप मे शामिल किया गया. गिरिडीह मे साम्राज्य का हिस्सा हज़ारीबाग,धनबाद, आदि इलाका मे साम्राज्य का हिस्सा था.मुगल साम्राज्य के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर अपनी पकड़ मजबूत बना लिया था.भारत का भविष्य को नए साम्राज्य शासको ने फिर से लिखना शुरू किया था.

     गिरिडीह जिला का आकड़ा

जिला  गिरिडीह
जनसंख्या  2445474
पुरुष जनसंख्या   1258098
महिला जनसंख्या   1187376
क्षेत्रफल  4854 वर्ग किलोमीटर
भाषा  हिंदी
गांव की संख्या   2772
पंचायत की संख्या   358
थाना की संख्या   25
साक्षरता दर        63.44%
पुरुष साक्षरता दर  62.3%
महिला साक्षरता दर  39.5%
पिन कोड                815301
RTO CODE        JH11
क्षेत्रीय भाषा संथाली,खोरठा

     गिरिडीह जिला क्यों प्रसिद्ध है

  •  झारखण्ड राज्य के पूर्वोतर  दिशा मे स्थित एक जिला है,जो  खनिज़ ,अबरक, एवं कोयला के लिए प्रसिद्ध है. जो की गिरिडीह के बनियाडीह मे है. यह क्षेत्र जिला मुख्यालय से लगभग 6 से 7 किलोमीटर की दुरी मे है. जो गिरिडीह जिला का इतिहासिक कोल एरिया दर्जनों खदानों ब्रिटिश सरकार भूमिगत कोयला खदान बंद पड़ा है. जो बंद पड़ा कोयला खदानों मे लाखो मिलियन टन की उच्च कोटि का कोयला मौजूद है.

    गिरिडीह जिला कब बना

  • Giridih जिला को सन 4 दिसंबर 1972 को हज़ारीबाग जिला का कुछ हिस्सा को काटकर बनाया गया था.

     गिरिडीह जिला का चौहदी

  • यह गिरिडीह जिला उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत पूर्वीत्तर दिशा मे है.जिसका चौहदी उत्तर मे जमुई और नवादा जिला (बिहार) स्थित है.इसके पूर्व दिशा मे देवघर और जामताड़ा जिला (झारखण्ड) स्थित है.और दक्षिण दिशा मे धनबाद और बोकारो जिला (झारखण्ड) है.जबकि इसके पश्चिम दिशा मे हज़ारीबाग एवं कोडरमा जिला स्थित है.

     गिरिडीह जिला मे कितना प्रखंड है

  • प्रखंड भारत देश का एक प्रशानिक इकाई है जो एक राज्य के कई जिलो से मिलकर बना होता है एक जिले के अंदर कई प्रखंड होते है और एक प्रखंड मे कई गाँव शामिल होता है.उसे प्रखंड कहा जाता है,उसी तरह से गिरिडीह जिला मे कुल 13 प्रखंड है जो इस प्रकार है.
  1. बगोदर
  2. बेंगाबाद
  3. बिरनी
  4. देवरी
  5. धनवर
  6. डुमरी
  7. गण्डेय
  8. गावाँ
  9. जमुआ
  10. पीरटांड
  11. सरिया
  12. गिरिडीह
  13. तिसरी

    गिरिडीह जिला मे कितना अनुमंडल है

  • अनुमंडल देश का एक प्रशानिक इकाई है जो एक राज्य के अंदर कई जिलों को मिलाकर बना होता है.उसमे कई अनुमंडल भी शामिल होते है उसी प्रकार से गिरिडीह जिला मे भी कुल 4 अनुमंडल को शामिल किया गया है.
  1. डुमरी
  2. बगोदर-सरिया
  3. खोरिमहुआ
  4. सदर

     गिरिडीह जिला मे कितना पंचायत है

  •  जिला मे कुल 358 पंचायत है और 2772 गाँव है.

     गिरिडीह जिला मे कितना निर्वाचित विधानसभा क्षेत्र है

  • विधानसभा वह क्षेत्र है जो भारत के राज्यों मे लोकतंत्र का निचला प्रतिनिधि सभा होता है ये एक विधान मण्डल का एक अंग होता है इन सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष तौर पर मतदान के तहत किया जाता है.जिससे 18 वर्ष से ऊपर के सभी वर्ग के भारतीय नागरिक अपना मत मतदान कर सकते है.उसी प्रकार से गिरिडीह जिला के अंतर्गत 6 निर्वाचित विधानसभा क्षेत्र है जो इस प्रकार से है.
  1. बगोदर
  2. जमुआ
  3. गांडेय
  4. गिरिडीह
  5. धनवर
  6. डुमरी

    गिरिडीह जिला का जलवायु

  • जलवायु वह शब्द है जो मौसम के सभी तत्व शामिल होते है किसी क्षेत्र का तापमान वायुदाब,वायु,प्रवाह, नमी, वर्षा आदि का काम से काम तीस वर्षों का औसत को उस क्षेत्र का जलवायु कहते है.गिरिडीह जिला का सामान्य जलवायु शुष्क है.गर्मी राज्य के बाकी हिस्सों की तरह तापमान बहुत गर्म रहता है.गर्मी का मौसम यहाँ अप्रैल माह मे शुरू होता है जबकि मई-जून के माह मे इस क्षेत्र मे भीषण गर्मी रहता है.तापमन यहाँ पर लगभग 42 डिग्री सेल्शियस तक बढ जाता है. गिरिडीह जैसे शहर मे तापमान 47 डिग्री सेल्शियस तक बढ़ने का ज्यादा संभावना रहता है.जबकि पहाड़ी इलाका मे तापमान ऊँचाई के कारण क्षेत्र कम हो जाता है बरसात के मौसम के कारण क्षेत्र मे नमी का स्तर जून माह मे पूरा शहर मे मानसून आ जाता है.जबकि जुलाई-अगस्त के माह तक मानसून की बारिश कि मात्रा बढ़ जाता है यहाँ पर सितम्बर तक बारिश होता रहता है.

    गिरिडीह जिला मे स्वास्थ सेवा प्रबंध

  •  स्वास्थ सेवा या फिर हेल्थकेयर का अर्थ बीमारी कि रोकथाम और उपचार करना ही स्वास्थ सेवा कहते है. चिकित्सा,दांत चिकित्सा नर्सिंग और स्वास्थ से सम्बंधित पेशेवर के तहत प्रदान किया जाता है.स्वास्थ सेवा को व्यक्ति और परिवेश से तालमेल के रूप मे परिभाषित करता है. देह का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना और स्वास्थ से तालमेल बना के रखना ही स्वास्थ का पहचान है.

    सदर अस्पताल गिरिडीह

  • 2011 के जनगणना के अनुसार इस गिरिडीह क्षेत्र मे 1.5 मिलियन से अधिक आबादी है.जनसंख्या मे वृद्धि के साथ बेहतर स्वास्थ स्थिति सुबिधाओं और स्वच्छ कि मांग मे वृद्धि होता है.गिरिडीह जिला एक उभारता हुआ एक जिला है जो अपने गिरिडीह के नागरिको का स्वास्थ आवश्यकताओ को पूरा करने मे सक्षम है.निजी अस्पताल और सरकारी अस्पताल स्वास्थ इकाई को प्रदान करता है और राज्य सरकार अपने जिला मे स्वास्थ सेवा के लिए विस्तृत स्वास्थ सेवा उपलब्ध किया है.राज्य सरकार सक्रिय रूप से उच्च स्वास्थ स्थिति को प्राप्त करने कि दिशा मे काम कर रहा है.जिसका लक्ष्य है लागत चिकित्सा देखभाल करना, गिरिडीह सदर अस्पताल जो गिरिडीह के क्षेत्र के निवासीयों को मुफ्त मे चिकित्सा सेवा प्रदान करता है.इस अस्पताल मे भयानक बीमारी को ठीक करने के लिए नया चिकित्सा तकनिकों को सृज्जित किया गया है.इस अस्पताल मे पूरे साल रोगियों का आघात होता है, अस्पताल मे विभिन्न गाँवो मे कई तरह के स्वास्थ शिविर सेवा आयोजित होता रहता है और दूर स्थित गाँव मे चिकित्सा उपचार प्रदान करता है सदर अस्पताल आपातकालीन समय के लिए उपचार सेवा प्रदान किया जाता है.उसी तरह से ओर कई निजी अस्पताल और सरकारी अस्पताल गिरिडीह जैसे जिले मे उपलब्ध है जैसे :- रोटरी आई अस्पताल,सदर अस्पताल,नवजीवन नर्सिंग होम,और जीडी बगरिया सेवा सदन,आदि अस्पताल उपलब्ध है.

    गिरिडीह जिला मे शिक्षा

  •  प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय DSE के प्रशानिक नियंत्रण मे रहता है,जबकि बुनियादी विधालय SDEO के नियंत्रण मे रहता है,उच्च विद्यालय (High school) DEO के नियंत्रण मे रहता है.गिरिडीह जिला मे हर तरह के विद्यालय मौजूद है जो गिरिडीह जिला के बच्चों को अच्छी गुणवतापूर्ण शिक्षा मिल सके.सर्व शिक्षा अभियान से लेकर उच्च डिग्री कॉलेज का शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध है.गिरिडीह जिला मे 6-14 वर्ग के सभी बच्चों को उपयोगी प्रासंगिक प्राथमिक शिक्षा प्रदान करता है.विशिष्ट योजना और प्रक्रिया आधारित समय बंधन कार्य के रणनीति के माध्यम से शिक्षा कि गुणवत्ता को सार्वभौमिक बनाने और सुधारने कि पहल है.जिला के सभी ब्लॉक मे निर्मित BRC सृज्जित करता है.EGS से अपग्रेड किए गए सभी नई प्राथमिक स्कूलों ने स्कूल कि ईमारत के साथ प्रदान किया गया.इनमें से कुछ स्कूल प्रगतिशील मे है गर्ल्स एजुकेशन 256 मॉडल गर्ल्स NPEGEL के तहत प्राथमिक शिक्षा मे जागरूक बच्चों के लिए चल रही है,मॉडल कलस्टर सेंटर मे स्कूलों मे लड़कियों के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण मिल रहा है.

    कार्मेल स्कूल गिरिडीह

  • कार्मेल स्कूल झारखण्ड राज्य के गिरिडीह जिला स्थित है.जो एक प्राइवेट  स्कूल है. यह  सेंट टेरेसा कि कार्मेलाइट सिस्टर्स के तहत 1954 मे स्थापित किया  गया था.ये स्कूल गिरिडीह क्षेत्र का प्रसिद्ध संस्थानों मे से एक है.इस कार्मेल स्कूल मे लड़कियों के लिए छात्रवास प्रदान करता है. कार्मेल स्कूल के छात्रों को कार्मेलाइट कहा जाता है.कार्मेल स्कूल का एक पड़ोसी शाखा भी है.जिसे कार्मेल हिंदी मिडियम स्कूल के नाम से जाना जाता है.जो छात्रों को हिंदी मिडियम से शिक्षा ग्रहण करते है.ये कार्मेल स्कूल ISC मिडियम और हिंदी मिडियम के  स्कूल दोनों मिडियम मे संचालित कि जाती है.यह स्कूल ईसा मसीह की शिक्षा से प्रेरित है.जिसका मूल्य था. प्रेम शांति,भाईचारा,समानता,आनंद सेवा क्षमा आदि.यह एक अल्पसंख्यक स्कूल है. एक कैथोलिक स्कूल के रूप मे यह मानव व्यक्ति,जीवन और दुनिया की दृष्टि के आधार पर युवाओं को विकास में बढ़ावा देने का प्रयास करता है.मदर टेरेसा की भावना और करिश्मे के प्रति वफादर युवाओ को नागरिक बनाने का सामान्य लक्ष्य को मिलकर काम करते है. कार्मेल स्कूल का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि युवाओ को अपने राष्ट्र के ईमानदार सक्रिय और प्रतिबद्ध नागरिक बनाने के लिए प्रयास रहता है.प्रत्येक छात्रों को सविधान कि भावना के अनुसार भारत के निर्माण के लिए जिम्मेदार बनाते है.स्कूल कॉउन्सिल फॉर स्कूल सर्टिफिकेट न्यू दिल्ली से सम्बन्ध रखता है.

      पर्यटन स्थल और पारसनाथ पहाड़ 

  • पर्यटन स्थल वह प्राकृतिक का सुंदर और आकर्षक लोकप्रिय भ्रमण स्थल है जो इंसान घूमने-फिरने के उद्देश्य से और दर्शन करने क लिए जाते है.
  •  पारसनाथ पहाड़ भारत के झारखण्ड राज्य के छोटानागपुर पठार गिरिडीह जिला मे स्थित है.जो विश्व भार का एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थयात्री स्थल है.यह पारसनाथ पहाड़ 1350 मीटर यानि कि 1.35 किलोमीटर ऊँचा पहाड़ है.जो झारखण्ड राज्य का सबसे ऊँचा पहाड़ का दर्जा मिला है.यह पारसनाथ पहाड़ देश भार मे प्रसिद्ध है.यहाँ पर हर साल लाखों कि तदाद संख्या मे जैन धर्म वाले लोग पूजा-अर्चना करने लिए आते रहते है.जो भारत के झारखण्ड राज्य के गिरिडीह जिला के मधुबन इलाका मे है.सम्मेद शिखर जैन धर्म को मानने वाले का एक प्रमुख धर्म स्थान है. जैन धर्म के अनुसार धर्मशाशास्त्रों मे 24 मे से 20 तीर्थकरो और अनेक संतो व मुनियो ने पारसनाथ पहाड़ मे मोक्ष प्राप्त किया था.इसलिए इस क्षेत्र को सिद्धक्षेत्र कहा जाता है. और जैन धर्म मे इसे तीर्थराज यानि कि तिर्थो का राजा कहा जाता है.ये पारसनाथ पहाड़ी के कुल मंदिर 2000 साल से अधिक पुराना माना जाता है.पारसनाथ पहाड़ी ये जगह प्राचीनकल मे ही मंदिरों कि उत्पति हुई है.संथाल समाज के आदिवासी लोग इस देवता को पहाड़ी मंदिर को मारांग बुरु के नाम से पुकारते है.

    खंडोली डैम

  • खंडोली डैम झारखण्ड के गिरिडीह जिला के बेंगाबाद क्षेत्र मे है.यह डैम गिरिडीह जिला से 10 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा मे है.यह खंडोली डैम झारखण्ड का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है.खंडोली डैम  शहर के लाखों लोगो से अधिक निवासीयों को जल का पूर्ति करता है.खंडोली डैम का आकार एक सेंडल का शेप जैसा है,जो ग्रेनाइटॉयड गानीस से बना है.खंडोली चोटी ज्वालामुखी शंकु के समान दिखता.इस डैम मे एक विशाल सैडल भी है.यह खंडोली डैम गिरिडीह शहर से 11 किलोमीटर खंडोली रोड NH114A कि दुरी मे है.इस खंडोली डैम का निर्माण 1955 मे शुरू कियक गया था.इस डैम को बनाने मे लगभग 2 वर्ष का समय लिया था.खंडोली डैम का ओपनिंग 1957 मे कियक गया था.जिसका ऊँचाई लगभग 51 फिट यानि कि 16 मीटर है.